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  • Wednesday July 06,2022

नई आबकारी नीतिः ठेकेदारों की तोड़ी मोनीपॉली, 102 दुकानें अब सरकार चलाएगी

उदयपुर. नई आबकारी नीति में बार-बार नीलामी प्रक्रिया के बावजूद शराब कारोबारियों के नहीं आने पर अब सरकार सख्त हो गई। सरकार ने ठेकेदारों की मोनोपॉली तोड़ते हुए पहले चरण में जयपुर व उदयपुर की 102 दुकानों को राजस्थान स्टेट ब्रेवरीज कॉपरेशन लिमिटेड (आरएसबीसीएल) व गंगानगर शुगर मिल (जीएसएम) को दे दिया। यह सभी दुकानें 70 लाख से लेकर 2 करोड़ के बीच की बताई गई है। हालांकि बिना गारंटी पूर्ति के कंपनियों को दुकानें सौंपने से सरकार को राजस्व घाटा है लेकिन पड़त दुकानों को चलाने के लिए इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है।

सरकार अब बची 672 दुकानों को भी कंपनियों को देने का पूरा मानस बना लिया है। पूरे प्रदेश में 7665 दुकानों में से पहले चरण में 2556 दुकानों का ही नवीनीकरण हो पाया था। बची 5109 दुकानों के लिए सरकार ने पॉलिसी में कई रियायत दी और नीलामी के पांच चरण किए लेकिन इसके बावजूद 774 दुकानें पड़त में रह गई।

इन दुकानों को चलाने के लिए पहले चरण में सरकार ने जयपुर की 82 व उदयपुर की 20 दुकानों को आरएसबीसीएल व जीएसएम को दे दिया, कुछ दुकानें आरटीडीसी को भी देने की तैयारी है। अन्य जिलों की पड़त दुकानों को भी सरकार इसी तरह से कंपनियों को देकर राजस्व कमाएगी।

सरकार की उम्मीदों पर खरी उतर जाए कंपनियां
सरकार ने आरएसबीसीएल, जीएसएम व आरटीडीसी को करोड़ों की दुकानें तो सुपुर्द कर दी लेकिन इन दुकानों पर कोई गारंटी तय नहीं है। यह शराब उठाए या न उठाए, बेचे या न बेचे इन पर कोई दबाव नहीं है। ऐसी स्थिति में माल गोदामों में भरा रहेगा।

सरकार व विभाग का मानना है कि संबंधित कंपनियों के सुपुर्द की गई कई दुकानें महंगी है, उन पर ग्राहकी अच्छी है। बस संबंधित कंपनियां नियमानुसार यहां व्यवसाय करे तो निश्चित रूप से राजस्व आ सकता है। गौरतलब है कि पूर्व में इन्हीं कंपनियों को गारंटी पूर्ति की शर्त पर दुकानें दी तो तो यह दो से तीन माह भी नहीं चला पाए थे।

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